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Showing posts from September, 2023
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भारत में महिलाओं की स्थिति : कल और आज (Women In India) आज आजादी के 70 सालों बाद भी भारत में महिलाओं की स्थिति संतोषजनक नही कही जा सकती। आधुनिकता के विस्तार के साथ-साथ देश में दिन- प्रतिदिन बढ़ते महिलाओं के प्रति अपराधों की संख्या के आंकड़े चौकाने वाले हैं। उन्हें आज भी कई प्रकार के धार्मिक रीति-रिवाजों, कुत्सित रूढ़ियों, यौन अपराधों, लैंगिक भेदभावों, घरेलू हिंसा, निम्नस्तरीय जीवनशैली, अशिक्षा, कुपोषण, दहेज उत्पीड़न, कन्या भ्रूणहत्या, सामाजिक असुरक्षा, तथा उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। हालांकि पिछले कुछ दशकों में रक्षा और प्रशासन सहित लगभग सभी सरकारी तथा गैर-सरकारी क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, उनकी स्वायत्तता तथा अधिकारों का कानूनी एवं राजनैतिक संरक्षण, तेजी से बदलते सकारात्मक सामाजिक नज़रिये, सुधरते शैक्षणिक स्तर, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं में उनकी प्रतिभागिता एवं कौशल तथा सिनेमा, रचनात्मकता, व्यापार, संचार, विज्ञान तथा तकनीकि जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में कई बड़े बदलाव भी देखने में सामने आये हैं। लेकिन यह महज शुरुआत भर है। जब तक समाज के प्रत्येक वर्ग में महिला...
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  संगीत के साथ मेरा अनुभव                                                                                                    सुव्यवस्थित ध्वनि; जो रस की सृष्टि से उत्पन्न होती है, वह संगीत कहलाती है। संगीत सभी के जीवन में अहम भूमिका निभाता है। यह हमें खाली समय में व्यस्त रखता है और हमारे जीवन को शातिपूर्ण बनाता है। संगीत के मोहक सुर की मादकता का जीव-जगत पर जो प्रभाव पड़ता है, वह किसी से छिपा नहीं है। संगीत के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनका हम अपनी आवश्यकता और जरूरत के अनुसार आनद ले सकते हैं। इस व्यस्त, भीड़-भाड़ युक्त और भ्रष्ट संसार में हर कोई दुसरे को हानि पहुँचाना चाहता है; ऐसे कठिन समय में संगीत हमें खुश रखता है और हमारे मस्तिष्क को राहत प्रदान करने में मदद करता है। मैंने अपने जीवन में यह महसूस किया है कि संगीत वास्तव में हमेशा खुश ...
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  कार्यस्थलों पर यौन शोषण की खुली दास्तान: मीटू आंदोलन #MeToo विश्व की जनसंख्या में महिलाओं की भागीदारी लगभग आधी है, किंतु वे विश्व के सकल घरेलू उत्पाद में केवल 33% हिस्सा ही उत्पादित करती हैं। वजहें कई हो सकती हैं, लेकिन सबसे बड़ी वजह महिलाओं की असुरक्षा से जुड़ी हुई है। भारत में महिलाएँ सड़क पर और यहाँ तक कि घर के अंदर भी स्वतंत्र और सुरक्षित नहीं हैं। पहले तो उन्हें सामाजिक रीति रिवाज और धार्मिक प्रतिबंध उबरने नहीं देते, दूसरी बाधा उनके आगे लैंगिक भेदभाव की आती है, जिसमें उन्हें पुरुषों की तुलना में काम के कम अवसर और समान काम के लिए कम वेतन दिया जाता है। तीसरा और सबसे बड़ा मुद्दा महिलाओं का कार्यस्थल पर होने वाला यौन शोषण है। जिस पर बहुत ज्यादा खुलकर कभी बात होने नहीं पाती। मसलन समस्या, समस्या न रहकर नासूर बन जाती है। लेकिन अब ऐसा नही है। आजकल सोशल मीडिया पर हैशटैग मीटू नाम से कुछ इसी प्रकार की एक मुहिम चल रही है, जिसमें महिलाएं अपने साथ हुए दुर्व्यवहारों के खिलाफ खुलकर बोल रही हैं। जिससे महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है। मीटू आंदोलन कई स्थानी...